यूपी में बदमाशों के साथ हई मुठभेड़ में आठ                 पुलिसकर्मी शहीद।

मनीषबलवान सिंह जांगड़ा, हिसार
यूपी के कानपुर में एक मुठभेड़ के दौरान उतरप्रदेश पुलिस के डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की बदमाशों की तरफ से हुई ताबड़तोड़ फ़ायरिंग में मौत हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, घटनास्थल पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है।

यूपी पुलिस डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने बताया, "कल रात मशहूर अपराधी और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने के लिए पुलिस चौबेपुर थाना क्षेत्र में दिकरु गांव में रेड डालने गयी थी। वहां पुलिसदल पर छतों से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। जिसमे पुलिस के आठ जवान शहीद हुए हैं। इसमे डीएसपी देवेंद्र मिश्र, तीन सब इंस्पेक्टर, 4 कॉन्स्टेबल हैं। मौके पर एसएसपी,आईजी हैं और भारी पुलिसबल तैनात है। कानपुर की फोरेंसिक टीम जांच कर रही है। एसटीएफ को भी लगा दिया गया है।"

सर्च ऑपरेशन जारी।

कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया, "बदमाशों की तऱफ से छतों से फायरिंग की गई, आत्मरक्षा में पुलिस ने भी फायरिंग की। गोलीबारी में कमांडिंग ऑफिसर देवेंद्र मिश्र समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं।"

पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और गांव को चारो तरफ से घेर लिया है। पुलिस के मुताबिक विकास दुबे से संपर्क रखने वाले 100 से ज्यादा लोगों के मोबाइल सर्विलांस पर रखा है। कानपुर के अलावा कानपुर देहात व कन्नौज से भी पुलिसदल को बुलाया गया है।

विकास दुबे पर 60 से अधिक आपराधिक मामले।

शातिर अपराधी विकास दुबे पर आपराधिक मामलों के अलावा कई गंभीर मामले दर्ज हैं। विकास दुबे पर 2003 में राज्यमंत्री का दर्ज़ा प्राप्त संतोष शुक्ला की हत्या का आरोप है। गौरतलब है की 2003 में कानपुर देहात के शिवली थाने के अंदर घुस कर इंस्पेक्टर रूम में बैठे तत्कालीन श्रम संविदा बोर्ड के चैयरमेन, राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त भाजपा नेता संतोष शुक्ल को गोलियों से भून दिया था। कोई गवाह न मिलने के कारण केस से बरी हो गया। 

कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में भी विकास का नाम आया था। कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र में ही वर्ष 2000 में रामबाबू यादव की हत्या के मामले में विकास पर जेल के भीतर रहकर साजिश रचने का आरोप है। विकास दुबे की राजीनीति में भी पकड़ रही है, सभी राजनीतिक पार्टियों की छत्रछाया विकास दुबे को प्राप्त थी इसकी वजह  यह पुलिस के चंगुल से बचता रहा।

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