तिब्बत की आजादी, कैलाश मानसरोवर की मुक्ति व भारत की सुरक्षा को प्रदर्शन

तिब्बत की आजादी, कैलाश मानसरोवर की मुक्ति व भारत की सुरक्षा हमारा हक

तीनों मामलों में चीनी दूतावास पर भारत-तिब्बत सहयोग मंच के सदस्यों का प्रदर्शन

शिवचरण ( शिवा )
गुरुग्राम। 
तिब्बत की आजादी, कैलाश मानसरोवर की मुक्ति और भारत की सुरक्षा, इन तीनों मुद्दो को लेकर बुधवार को भारत-तिब्बत सहयोग मंच के बैनर तले दिल्ली में लोग गरजे। चीनी दूतावास पर विशाल विरोध प्रदर्शन करने की योजना थी, लेकिन पुलिस ने वहां से पहुंचने से पहले ही रोक दिया। बीच सड़क पर मंच के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। चीन द्वारा भारत पर 20 अक्टूबर 1962 को किये गये आक्रमण की 59वीं बरसी पर चीनी दूतावास पर विशाल विरोध प्रदर्शन में बुधवार को भारत-तिब्बत सहयोग मंच के बैनर तले पहुंचे लोगों ने चीन के विरोध में नारे लगा। हाइफा चौक (तीन मूर्ति दिल्ली) से चीनी दूतावास तक पैदल मार्च होना था, लेकिन पुलिस ने मार्च को बीच में ही रोक दिया। इस दौरान सभी कार्यकर्ता बीच सड़क पर बैठ गये और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। इस विशाल विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व भारत-तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय महामंत्री पंकज गोयल ने किया।  

पंकज गोयल ने कहा कि 1906-7 ई0 में तिब्बत पर चीन ने अपना अधिकार बनाया और याटुंग ग्याड्से एवं गरटोक में अपनी चौकियां स्थापित की। 1912 ई0 में चीन से मांछु शासन अंत होने के साथ तिब्बत ने अपने को पुनरू स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। सन् 1913-14 में चीन, भारत एवं तिब्बत के प्रतिनिधियों की बैठक शिमला में हुई, जिसमें इस विशाल पठारी राज्य को भी दो भागों में विभाजित कर दिया गया। सन् 1933 ई0 में 13वें दलाई लामा की मृत्यु के बाद से बाह्य तिब्बत भी धीरे-धीरे चीन द्वारा घेरा जाने लगा। 1951 की संधि के अनुसार यह साम्यवादी चीन के प्रशासन में एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया। इसी समय से भूमि सुधार कानून एवं दलाई लामा के अधिकारों में हस्तक्षेप एवं कटौती होने के कारण असंतोष की आग सुलगने लगी। बल प्रयोग द्वारा चीन ने इसे दबा दिया। अत्याचारों, हत्याओं आदि से किसी प्रकार बचकर दलाई लामा नेपाल पहुंच सके। अभी वे भारत में रहकर चीन से तिब्बत को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं। पंकज गोयल ने कहा कि भारत तिब्बत मंच भी यही आवाज पुरजोर तरीके से उठा रहा है कि तिब्बत को आजाद किया जाए, कैलाश मानसरोवर की मुक्ति की जाए। साथ ही भारत की सुरक्षा और अधिक मजबूत हो।

इस अवसर पर भारत तिब्बत मंच के हरियाणा प्रांत संयोजक अमित गोयल ने कहा कि जब तक मंच इन तीनों मांगों को पूरा कराने में कामयाब नहीं हो जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह मांग भारतीयों का हक है। यह हक भारतीय लेकर रहेंगे। इस अवसर पर गयरी डोलमा मंत्री निर्वासित तिब्बत सरकार, याशी फॉन्कचौक पूर्व मंत्री निर्वासित तिब्बत सरकार, दिल्ली प्रांत अध्यक्ष अजय भारद्वाज, महिला प्रांत मंत्री कुसुम गोला, सूरजभान पांडेय, मनोज श्रीवास्त समेत काफी संख्या में मंच के सदस्य मौजूद रहे।  

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