मनीषबलवान सिंह जांगड़ा, हिसार
इथोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में सोमवार की रात को इथोपियन संगीतकार हुचालु हुनदेसा की अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हुचालु हुनदेसा की मौत से लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर आ गए हैं और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे है जिसमे अब तक 90 लोगों की मौत हो चुकी है और करोडों की संपति का नुकसान हो चुका है । सरकार ने हालात को नियंत्रण में करने के लिए इंटरनेट बन्द कर दिया है और सेना को बुलाया है।

इथोपिया का इतिहास।

इथोपिया पूर्वी अफ्रीका का प्राकृतिक संसाधनों से युक्त देश है। इथोपिया का नाम ग्रीक भाषा से आया है जिसका मतलब है सुलगती आंखों वाला। इथोपिया का इतिहास मानव इतिहास से जुड़ा है क्योंकि ये वही स्थान है जहां से इंसानी इतिहास की शुरुआत हुई। इथोपिया में सितम्बर 1974 तक राजशाही थी जिसका इथोपिया की सेना ने तख्ता पलट दिया। सालों चले गृहहयुद्ध के बाद 1991 में इथोपिया में इथोपियन पीपल्स रेवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट( ईपीआरडीएफ) की सरकार बनी जिसमे कई एथनिक समूहों का प्रतिनिधित्व था। 

इथोपिया की एथनिक पहचान।

इथोपिया में करीब 80 एथनिक समूह हैं जिसमे ओरोमा समूह बहुसंख्या में है जिसका इथोपिया की 11 करोड़ आबादी में 5 करोड़ की हिस्सेदारी है। ओरोमा समूह शुरू से ही राजनीति व आर्थिक मोर्चे पर अपनी हिस्सेदारी के लिए सरकार से लड़ते आ रहा है।

1991 की सरकार में टिगेरियन समुदाय का दबदबा रहा और 1992 ने टिगेरियन सरकार ने ओरोमा समुदाय के हितों की अनदेखी की तो ओरोमा समूह का सरकार से टकराव शुरू हो गया। इसी टकराव में 2003 में 17 साल की उम्र में हुनदेसा ने एक प्रदर्शन मे हिस्सा लिया तो उन्हें 5 साल के लिए जेल में डाल दिया। जेल में उन्हें गाने लिखने और राजनीति में रुचि हुई । जेल से रिहा होने के बाद 2009 में हुनदेसा ने अपनी एक म्यूजिक एल्बम रिलीज़ की  जो बहुत मशहूर हुई। 2013 में उनकी म्यूजिक एल्बम अफ्रीका की सबसे ज्यादा बिकने वाली एल्बम बनी। 

2018 में हैइलेमरियम डेसलीजिन का इस्तीफ़ा।

ओरोमा समुदाय और सरकार के बीच तनातनी की वजह से फरवरी 2018 में हैइलेमरियम डेसलीजिन ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 2 अप्रैल 2018 को ओरोमा डेमोक्रेटिक पार्टी से अबी अहमद इथोपिया के प्रधानमंत्री बने। अबी अहमद ओरोमा समुदाय से थे तो उन्होंने ओरोमा समुदाय के हितों के लिए कदम उठाये। अबी ने लोकतांत्रिक कदम उठाते हुए प्रेस से सेंसरशिप को हटाया व हज़ारों कैदियों को जेलों से रिहा किया। इरिट्रिया के साथ सालों से चल रहे सीमा विवाद को खत्म किया जिसकी वजह से अबी अहमद को 2019 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला।

गौरतलब है कि मई 2018 में इरिट्रिया के राष्ट्रपति जब इथोपिया आये थे तो हिचुला हुनदेसा ने मंच से ओरोमा समुदाय के हितों की बात की तो सरकार ने इसकी आलोचना की। इसके बाद से हुनदेसा ने अपनी जान को ख़तरा बताया लेकिन सरकार ने कोई सुध नही ली।

शव को दफनाने को लेकर संघर्ष।

हुनदेसा के समर्थकों की मांग थी की हुनदेसा के शव को हादिस अबाबा में सम्मान से दफनाया जाए लेकिन सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हुनदेसा के पार्थव शरीर को उनके गृह नगर आम्बो में दफनाने का फैसला किया है जिसको लेकर प्रदर्शन और तेज़ हो गए हैं।

हुनदेसा हमेसा हमारे दिलो में जिंदा रहेंगे।

हुनदेसा की पत्नी ने कहा, "हुनदेसा मरे नही हैं, वो ओरोमा के लाखों दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। मैं चाहती हूं की हुनदेसा की आदिश अबाबा में एक स्मारक बने जहां उन्हें गोली मारी गई थी।"



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