'फेयर एंड लवली' में फेयर शब्द नही रहेगा।

मनीषबलवान सिंह जांगड़ा, हिसार

मशहूर कंपनी यूनिलीवर ने अपने ब्यूटी प्रोडक्ट 'फेयर एंड लवली' का ब्रैंडनेम बदलने का फ़ैसला किया है। प्रोडक्ट का कथित रुप से गौरे रंग को बढ़ावा देने की वजह से कंपनी ने अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग का तरीका बदलने की घोषणा की है।

फेयर, वाइट, लाइट जैसे शब्दों पर रोक।

इसके साथ ही कंपनी ने फेयर, लाइट, वाइट, जैसे गौरे रंग को बढ़ावा देने वाले शब्दों का विज्ञापन में इस्तेमाल न करने का फ़ैसला किया है। कंपनी के मुताबिक हाल ही के दिनों में ब्यूटी प्रोडक्ट को लेकर लोगों नज़रिया बदला है। ऐसे में कंपनी ने ऐसे शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने जा रही है जो किसी त्वचा के रंग विशेष को बढ़ावा देते हैं या सांवले रंग को छुपाने को प्रोत्साहित करते हैं। कंपनी के ब्यूटी और पर्सनल केयर डिवीजन के अध्यक्ष सन्नी जैन ने बताया 'ब्यूटी प्रोडक्ट को लेकर समाज में जो नजरिया बदला है हम उसका सम्मान करते हैं। ये नज़रिया सभी लोगों के स्किन के रंग व टोन्स का ख्याल रखता है। हमारे प्रोडक्ट्स के विज्ञापन में फेयर, वाइट, लाइट जैसे शब्दों का इस्तेमाल खूबसूरती के एक तरफ़ा नज़रिये का बढ़ावा देते हैं जोकि सही नही है। हम अपने प्रोडक्ट के ब्रैंडनेम व विज्ञापन का तरीका बदलने जा रहे हैं'।

'फेयर एंड लवली' की बड़ी डिमांड।
ब्यूटी क्रीम 'फेयर एंड लवली' की भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, इंडोनेशिया, थाईलैंड के अलावा एशिया के दूसरे देशों में भी बड़ी डिमांड है। इन दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे प्रोडक्ट्स को लेकर नाराज़गी बढ़ी है। यूनिलीवर का दक्षिण एशिया के बाज़ारों में काफ़ी दबदबा है क्योंकि इसके प्रोडक्ट आम आदमी के पहुंच में हैं। यूनिलीवर के अलावा लोरियल, जॉनसन एंड जॉनसन जैसे कंपनियां भी हैं जो बाज़ार में ऐसे ब्यूटी प्रोडक्ट को बेचती हैं।


'ब्लैक लाइव्स मैटर्स' मुहिम का असर।

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की एक गौरे पुलिस अधिकारी द्वारा कथित रूप से हत्या के मामले के बाद दुनियाभर में इंसान की त्वचा के रंग को लेकर आंदोलन चल रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, जैसे यूरोपीय देशों में 'ब्लैक लाइव्स मैटर्स' मुहिम के बाद काले-गौरे रंग को सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। ऐसे में सभी कंपनियां बाज़ार के माहौल को लेकर सचेत हैं तथा अपनी रणनीति को बदलने पर विचार कर रही हैं।

ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बहिष्कार की पुरानी डिमांड।

भारत में 'फेयर एंड लवली' साल 1975 से बिक रही है। समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' के मुताबिक भारत में पिछले साल फेयर एंड लवली को बेचकर कंपनी ने 50 करोड़ डॉलर की कमाई की थी। भारत ने फेयर एंड लवली की मार्केटिंग के तरीके को लेकर पहले भी बहस छिड़ी थी लकिन जॉर्ज फ्लॉयड की मौत ने इसे फिर से जिंदा किया है।

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