नेपाल में भारतीय न्यूज़ चैनल बैन। 

मनीषबलवान सिंह जांगड़ा, हिसार
नेपाल में सियासी उठापटक के बीच दूरदर्शन के अलावा सभी प्राइवेट चैनलों को बैन कर दिया है। नेपाल में भारतीय न्यूज़ चैनलों पर नेपाल के प्रधानमंत्री ओपी ओली के ख़िलाफ़ प्रोपोगेंडा रचने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नही हुआ है लेकिन ज़्यादातर केबल ऑपरेटर्स ने भारतीय न्यूज़ चैनलों के सिग्नल को बंद कर दिया है।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नेपाल में दूरदर्शन को छोड़कर सभी न्यूज़ चैनलों को बंद किया जा रहा है। ये जानकारी केबल ऑपरेटर्स ने दी है। हालांकि नेपाल सरकार के प्रवक्ता की तरफ से एक ऐसा ही बयान आया है जिससे बैन की ख़बर पुख्ता होती है।
नेपाल में सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ता व पूर्व उप प्रधानमंत्री नारायण काजी श्रेष्ठा ने भारतीय मीडिया की जमकर आलोचना की। नेपाली मीडिया के अनुसार उन्होंने कहा
भारतीय मीडिया नेपाल सरकार और पीएम ओली के खिलाफ लगातार आधारहीन प्रोपेगेंडा चला रहा है, जिसने सभी हदें पार कर दी हैं. ये अब काफी ज्यादा हो रहा है. ये बकवास बंद करनी चाहिए।”

भारत नेपाल में विवाद बना हुआ है।

कुछ हफ़्तों से नेपाल और भारत में सीमाविवाद को लेकर तक़रार चल रहा है। ये तक़रार लिपुलेख सड़क विवाद को लेकर शुरू हुआ था। जिसके बाद नेपाल सरकार ने संसद में एक नक्शा पास किया था, जिसमें कई भारतीय इलाकों को नेपाल ने अपना बताया था। इस कदम का भारत सरकार ने भी कड़ा विरोध जताया। 

नेपाल में सरकार ख़तरे में है।

नेपाल में सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी(एनसीपी) पर ख़तरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री ओपी ओली पर सेंट्रल कमेटी के सदस्य लगातार तानाशाही का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में पीएम सेंट्रल कमेटी की बैठक में भी शामिल होने से बच रहे हैं और पार्टी से बाहर बयान दे रहे हैं। पार्टी के भीतर उनपर ज्यादा दबाव बन रहा है और विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में एनसीपी की सरकार गिर सकती है। प्रधानमंत्री ओपी ओली भारतीय दूतावास व दिल्ली में हो रही बैठकों को इस सियासी उठापटक का जिम्मेदार मानते हैं इसलिए जनता में भारतीय पक्ष की बातों के प्रवाह को रोकने के लिए न्यूज़ चैनलों को बंद करवा रहे हैं ताकि जनता को ऐसी खबरों से दूर रखा जा सके।

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