मनीषबलवान सिंह जांगड़ा, हिसार
समुन्द्र से घिरे खूबसूरत देश जापान का प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का इतिहास रहा है। एक बार फिर भारी बारिश से आई बाढ़ और भूस्खलन से जापान में कम से कम 17 लोंगो की मौत हुई है।

जापान के दक्षिण में स्थित क्यूशू द्वीप पर बाढ़ से एक नर्सिंग होम में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है। लाखों घरों को खाली करवाने का आदेश दिया है। कुमामोटा प्रांत में कुमा नदी सामान्य स्तर से ऊपर बह रही है।

प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सेना को राहत कार्य के लिए बुलाया।


लगातार बिगड़े हालात को काबू करने के लिए प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने 10,000 सैनिकों को राहत कार्य के लिए तैनात करने का आदेश दिया है। प्रधानमंत्री आबे ने कहा रविवार को भारी बारिश की आशंका है ऐसे में लोग 'अधिक सावधानी बरते।'

बहोत से लोग अभी भी गायब।

प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने कहा, "अभी तक भूस्खलन से मरने वालों की सूचना प्राप्त हुई है"। लेकिन बहुत से लोग भी गायब हैं जिनका कोई आधिकारिक आंकड़ा नही है।
कुमा नदी के ऊपर बना पुल पानी में गायब हो गया है। सैंकड़ों मकान व कारें जलमग्न हो गयी हैं। वहीं जापान के मौसम विभाग का कहना है कि इस क्षेत्र में ऐसी बारिश कभी नही हुई।

सड़के बन गई हैं नदी।


बारिश से आई बाढ़ का कहर इस कदर उफान पर है की शहरों की बिल्डिंग पानी में डूब गई हैं। शहर में हर तरफ गैस की गंध और सीवर के गंदे पानी की बदबू है। सड़के नदी बन गई हैं और नदियों पर बने पुल गायब हो गए हैं। स्थानीय समाचार एजेंसी के मुताबिक कगोशिमा में 2 लाख से अधिक लोगों को घर खाली करवाने के लिए कहा गया है। इस क्षेत्र में ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है व घरों में बिजली नही है।

जापान में यह मॉनसून का मौसम है जिसके कारण बारिश और भूस्खलन का ख़तरा अक्सर बना रहता है। जिसकी वजह से स्थानीय प्रशासन घर खाली करने का आदेश देते हैं।

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