राफ़ेल को दुनिया के सबसे ताक़तवर लड़ाकू           विमानों में से एक माना जाता है। 

मनीषबलवान सिंह जांगड़ा, हिसार
हाल में भारत-चीन में सीमा विवाद के चलते तनातनी है ऐसे में बुधवार को हरियाणा के अम्बाला एयरबेस पर फ्रांस से  5 राफ़ेल लड़ाकू विमान की खेप भारत पहुंची है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय वायुसेना की ताक़त पहले से कहीं मजबूत होगी। 23 सितम्बर 2016 को भारत और फ्रांस के बीच 36 राफ़ेल जेट विमानों के लिए 59 हज़ार करोड़ की डील हुई थी जिसकी पहली डिलीवरी 10 विमानों की की होनी है जिसमें से 5 विमान भारत पहुंच चुके हैं और बाक़ी अभी फ्रांस में ट्रेनिंग के लिए रखे गए हैं।

          भारतीय वायु सीमा में राफ़ेल।

राफ़ेल को दुनिया के सबसे ताक़तवर लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। इसकी तुलना अमेरिका के एफ़-35 व एफ़-22 से की जाती है। राफ़ेल को डसॉल्ट एविएशन ने 4 जुलाई 1986 को इसे बनाया था 8 साल की फ्लाइट टेस्टिंग के बाद इसे 1996 में फ्रेंच वायुसेना में शामिल करना था लेकिन शीत युद्ध के बाद बजट में कमी व अंतरराष्ट्रीय मानकों के कारण इसे शामिल नही किया जा सका। 18 मई 2001 को फ्रांस ने इसे अपनी वायुसेना व नौ सेना में इसे शामिल किया। इसके अचूक निशानों व दुश्मन के राडार सिस्टम में बच निकलने की ख़ूबी इससे दुनियाभर के लड़ाकू विमानों में सबसे अलग बनाती है।

ऐसी क्या खूबियां हैं राफ़ेल में आइये जानते हैं।

राफ़ेल को फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन ने बनाया है जोकि एक बहुउद्देश्यीय 2 इंजन वाला जेट विमान है। इसका बिना पे लोड के वजन 10 टन है व मिसाइल के साथ इसका वजन 25 टन हैं।
राफ़ेल 15.27 मीटर यानि करीब 50 फ़ीट लंबा व 5.3 मीटर यानि 17.5 फ़ीट ऊंचा है। इसकी ईंधन क्षमता 17 हज़ार किलोग्राम है। यह अधिकतम 24,500 किलोग्राम वहन क्षमता के साथ 60 घण्टे तक लगातार उड़ सकता है। इसके साथ ही यह बेहद सर्द मौसम में भी उडान भर सकता है, यह काबिलियत हर लड़ाकू विमान में नही होती। 

राफ़ेल जेट वायु रक्षा, बेहद सटीक तरीके से हमले जहाज़ रोधी हमले की खासियत के साथ अधिकतम ऊंचाई पर 1.8 मैक यानि 2223 किलोमीटर प्रतिघण्टा की अधिकतम रफ़्तार के साथ उड़ सकता है व न्यूनतम ऊंचाई पर 1.1 मैक यानि 1390 किलोमीटर प्रति घण्टे के की रफ्तार के साथ उड़ सकता है।

यह एक मिनट में 60,000 फ़ीट की ऊंचाई पर पहुंच सकता है व एक बार में 3700 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है।

राफ़ेल स्टील्थ तकनीक के साथ लैस है जिसका मतलब है कि यह दुश्मन के राडार, इंफेरा रेड लाइट व रेडियो सिस्टम को चकमा दे सकता है। स्टील्थ तकनीक अमेरिका के बी-2 स्पीरिट, एफ़-22, एफ़-35 व चीन के जे-20 लड़ाकू विमानों में भी मौजूद है।

राफ़ेल कई मिसाइलों को लेकर उड़ सकता है। यह ज़मीन से हवा, हवा से हवा, हवा से जमीन व हवा से ज़मीन पर मारक क्षमता वाली न्यूक्लियर मिसाइल भी लेकर चल सकता है। मिटिऑर व स्काल्प मिसाइलों से लैस है। मिटिऑर मिसाइल हवा से हवा में मार कर सकती है जिसकी मारक क्षमता 100 किलोमीटर व स्काल्प मिसाइल जमीन से हवा में 560 किलोमीटर की रेंज तक मार सकती है। 

    हवा से ज़मीन पर हमला कर सकने वाली हैमर        मिसाइल

राफ़ेल हैमर मिसाइल से भी लैस है। राफ़ेल के साथ भारत हैमर मिसाइल भी खरीदने जा रहा है जोकि हवा से ज़मीन पर हमला कर सकती है जिसकी मारक क्षमता 50 से 60 किलोमीटर है।

राफ़ेल 100 किलोमीटर के भीतर एक बार में 40 लक्ष्यों का पता लगा सकता है।
ये लो लैंड जैमर, राडार वार्निंग रिसीवर, इसराइल में बने हेलमेट हैं जो माउंटेड डिस्प्ले से लैस है। इसके साथ ही इंफ़्रा रेड सर्च ट्रैकिंग सिस्टम और 10 घण्टे का फ्लाइट डाटा रेकॉर्डिंग की सुविधा भी है।

राफ़ेल का कॉम्बेट रेडियस 3700 किलोमीटर है यानि यह 1850 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन को मारकर वापिस आ सकता है।

राफ़ेल ने अपना पराक्रम अफगानिस्तान, लीबिया, इराक़ माली व सीरिया की लड़ाई में दिखाया है। फ्रांस, क़तर मिस्र के बाद भारत राफ़ेल को अपनी वायुसेना में शामिल करने वाला चौथा देश है।

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