मनीषबलवान सिंह जांगड़ा, हिसार
रुस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को उनके सवैंधानिक सुधारों के लिए रूस में भारी बहुमत मिला है जिससे वे 2036 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।

राष्ट्रपति पुतिन ने सविंधान में काफी बदलाव किये है जिनको लेकर पिछले सप्ताह रूस में वोटिंग हुई थी जिसमे 64 फीसदी लोगों ने हिस्सा लिया था। 200 से अधिक सवैंधानिक बदलावों को लेकर अब वोटों की गिनती हो चुकी है। चुनाव आयोग के मुताबिक 99.9 फीसदी वोटों की गिनती हो चुकी है जिसमे से अब तक 77.9 फीसदी वोट सुधारों के पक्ष में हैं जबकि 21 फीसदी लोगों ने विरोध में वोट डाले।

विपक्ष ने वोटो में धांधली के आरोप लगाए।

विपक्ष का आरोप है की पुतिन आजीवन राष्ट्रपति बने रहना चाहते हैं। रूसी सरकार के बड़े आलोचक अलेक्सी नवालनी ने जो परिणाम घोषित हुए हैं उनको झूठ कहकर खारिज़ किया है, उनका कहना है की जो परिणाम घोषित हुए है ये जनता की राय को नही बताते। सात दिनों की वोटिंग ख़त्म होने से पहले ही बुकस्टाल पर सविंधान की नई प्रितियाँ बिकती हुई मिली है जिससे ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल नही है की वोटों में धांधली हुई है।

इंटरफैक्स की रिपोर्ट मुताबिक रूस के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने ये घोषणा की थी की वोटिंग के दौरान कोई हिंसा नही हुई है जबकि उस वक्त तक भी वोट पड़ रहे थे।

सवैंधानिक परिवर्तनों के ख़िलाफ़ सेंट पीटर्सबर्ग और मॉस्को की सड़कों पर सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किये थे।

पुतिन 6-6 सालों की दो और टर्म तक राष्ट्रपति रह सकते हैं।

67 के व्लादिमिर पुतिन 20 साल से सत्ता में काबिज़ हैं। इस सवैंधानिक परिवर्तनों के बाद 6-6 साल की दो और टर्म तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं हालांकि उन्होंने अभी तक नही कहा है की 2024 के वे फिर से राष्ट्रपति के चुनावों में हिस्सा लेंगे। लेकिन एक बयान में उन्होंने कहा है की ये अहम है कि उनके पास ऐसा करने का विकल्प है।

वोटिंग कोरोना काल से प्रभावित।

अमूमन रूस में वोटिंग के दौरान खुशनुमा माहौल होता है, वोटिंग बूथ पर सगींत, खाने का प्रबंध होता है। लेकिन इस बार लाइन में लगे लोगों का थर्मल स्कैनर से शरीर का तापमान चेक किया जा रहा है था और सभी लोग मास्क में नज़र आये।
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