विभागीय अधिकारियों में नहीं किसी प्रकार का तालमेल

आम जनता को ही भुगतना पड़ रहा है खामियाजा

बड़ा सवाल मानसून में ही क्यों हो रहा विकास कार्य

फतह सिंह उजाला
पटौदी।
 यह कैसा विकास ? विकास के लिए हो रहे विकास कार्यों को देखते हुए विकास ही  तिलमिलाने लगा है, कि मैं कहां मानसून के बीच में आकर फस गया । हम बात कर रहे हैं पटौदी इलाके की हेलीमंडी नगर पालिका क्षेत्र में मुख्य मार्ग वार्ड नंबर 6 का , जोकि आरओबी रामपुर चैराहे से सीधा रामपुर गेट होते हुए अनाज मंडी और आगे रेलवे स्टेशन तक जाता है।

वार्ड पार्षद राजेंद्र गुप्ता रूस्तगी के मुताबिक रामपुर गेट से रामपुर चैराहे तक करीब 60 फुट चैड़े इस सड़क मार्ग का नव निर्माण-सौदर्यकरण करीब 55 लाख रुपए की लागत से किया जाना है। जिसके टेंडर होने के बाद वर्क आर्डर भी हो चुका है और अब यहां काम भी आरंभ किया जा चुका है । सवाल यह है कि जब यह टेंडर हुआ था अथवा प्रस्ताव पास हुआ था उसी समय जन स्वास्थ्य विभाग, जलापूर्ति एवं अभियांत्रिकी विभाग, हेलीमंडी पालिका के एमई-जई व अन्य अधिकारियों के बीच बैठकर इस बात का मंथन चिंतन क्यों नहीं किया गया । यहां पर विशेष रूप से सड़क के बीचो बीच हाई वोल्टेज जो बिजली के पोल लगे हैं वह कैसे शिफ्ट होंगे ? स्थानीय दुकानदार सचिन गोयल के मुताबिक जिस क्षेत्र में अभी निर्माण कार्य हो रहा है वहां सीवर लाइन ही नहीं डाली गई है । जबकि हेली मंडी क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में नई सीवर लाइन डाली जा चुकी है। अब सवाल वही आ जाता है क्या यह 55 लाख रुपए का रोड बनने के बाद में इसे फिर से तोड़कर सीवर लाइन डाली जाएगी ?


अब बात करते हैं बिजली के पोल की , गत दिनों स्थानीय दुकानदारों के कहने पर पटौदी के एसडीएम मौके पर पहुंचे । उन्होंने मौका मुआयना किया और बिजली अधिकारियों को दो टूक जवाब दिया कि सड़क के दायरे में जो भी बिजली के पोल आ रहे हैं इन्हें एक साइड में शिफ्ट कर दिया जाए । अब सवाल वही फिर खड़ा हो जाता है कि क्या बिजली के हाई वोल्टेज पोल एक साइड शिफ्ट करने से जो बड़े-बड़े कपड़े के शोरूम हैं वह कितने सुरक्षित रह सकेंगे ? बीते कुछ समय में यहां पर बिजली तारों में स्पार्किंग होने के कारण कपड़े के शोरूम में भी आग लगने से नुकसान हो चुका है अन्य दुकानदारों का भी नुकसान हुआ है । कपड़ा वस्त्र संघ के पदाधिकारी हरिओम रूस्तगी का साफ-साफ कहना है कि पालिका प्रशासन के द्वारा जो योजना बनाई गई है अथवा जो निर्देश दिए गए हैं कि बिजली के पोल एक साइड शिफ्ट किए जाएं वह एक प्रकार से सीधे-सीधे दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं । जब पालिका प्रशासन की योजना है कि सड़क के बीचो बीच पैसेज-हैज-डिवाडर बनाया जाएगा या पेड़ पौधे लगाने के लिए बनेगा तो क्यों ना बिजली के पोल 30 फुट चैड़े रोड के बीच में 5 फुट की पैसेज बनाकर उनके बीच में लगाए जाएं।  जिससे कि कोई समस्या ही नहीं रहेगी और सीधे अनाज मंडी के अंदर तक बिना किसी बाधा के बिजली की आपूर्ति के तार पहुंचेगे। संबंधित अधिकारी कमरे में बैठकर कागजों पर योजना बनाते हैं , फील्ड में आकर मौके पर पहुंचकर अनुभवी आदमियों से किसी प्रकार की कोई सलाह नहीं ली जाती है । जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है और उससे अधिक नुकसान सरकारी धन का होता है । जब विकास कार्य पूरे हो जाते हैं तो फिर से तोड़फोड़ करके नए सिरे से पीने के पानी के पाइप लाइन, सीवरेज पाइप लाइन व अन्य प्रकार के कार्य करना लोगों की जरूरत के साथ-साथ संबंधित विभागों की मजबूरी भी बन जाता है । क्योंकि मूलभूत सुविधाएं आम इंसान का संवैधानिक अधिकार है और इन सुविधाओं से कोई भी विभाग कोई भी अधिकारी आम व्यक्ति को वंचित नहीं रख सकता है ।


अब बात करते हैं की हाल ही में बरसात होने के बाद जलभराव हो गया । जलभराव होने से हाई वोल्टेज बिजली के पोल भी एक साइड झुक गए ? इतना ही नहीं एक गहरा खड्डा हो गया और एक भारी-भरकम पेड़ भी बीच में झुक गया । वही यहां पर बैंक है , बैंक में आने वाले तमाम उपभोक्ता सोमवार को परेशान रहे कि किस प्रकार बैंक में चढ़कर के घुसे और  बैंक से बाहर किस प्रकार से निकले, विशेष रूप से बुजुर्ग और महिला वर्ग को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा । आज भी हालात यह है कि संबंधित ठेकेदार ने आनन-फानन में रोड बनाने के लिए खुदाई तो कर दी, लेकिन इस खुदाई के बीच में आम इंसान, स्थानीय नागरिकों के पेयजल आपूर्ति के पाइप लाइन , सीवरेज के पाइप लाइन रात के अंधेरे में जेसीबी चलाते हुए क्षतिग्रस्त कर दिए गए । जिन्हें कि करीब 1 सप्ताह बाद भी लोग उन्हें अपने खर्चे पर भी सही प्रकार से नहीं जुड़वा सके हैं । एक परिवार तो ऐसा है जो कि बीते 5 दिनों से अपने शौचालय का मेन पाइप लाइन टूटने से गंभीर समस्या से जूझ रहा है । स्थानीय निवासी सुरेंद्र कुमार , विजय गुप्ता , एमपी जैन व अन्य का सीधा-सीधा कहना है कि लाखों रुपए के विकास कार्य किए तो जा रहे हैं , लेकिन जिस प्रकार यह आनन-फानन में किए जा रहे हैं उसके पीछे कहीं न कहीं खेल खेला जा रहा है। वह पर्दे के पीछे हैं और इस खेल का फायदा बेशक से कथित रूप से संबंधित ठेकेदार अधिकारियों को हो सकता है। लेकिन आज की जो स्थिति बनी है उसमें खामियाजा आम इंसान को ही भुगतना पड़ रहा है।

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