चीन ने संसद ने नया सुरक्षा कानून किया पारित

मनीषबलवान सिंह जांगड़ा,हिसार
चीन ने होंगकोंग की सुरक्षा को लेकर विवादित नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को पारित कर दिया है। जिसको लेकर आलोचकों और पश्चिम की सरकारों को अनुमान है कि इससे होंगकोंग की स्वतन्त्रता खत्म हो जाएगी और यह उसकी स्वायत्ता को कमज़ोर कर देगा।

मंगलवार को चीन की रबड़-स्टाम्प की संसद ने नए सुरक्षा कानून को मंजूरी दे दी है। कानून 1 जुलाई से हांगकांग में लागू हो जाएगा।इसे करीब छह हफ्ते पहले ही सार्वजनिक किया गया था जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। 

अंतरराष्ट्रीय मंच ने की चीन की आलोचना।

चीन के नए सुरक्षा क़ानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच की कड़ी आलोचना की है। अमेरिका ने चीन पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान ने नए सुरक्षा कानून को होंगकोंग की स्वतन्त्रता पर हमला बताते हुए चीन के खिलाफ एतराज जताया है।
बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा कि   हांगकांग में जो भी कुछ हो रहा है इससे हांगकांग को अमेरिकी कानून के तहत जो दर्ज़ा मिला था अब वो नही रहेगा। नए क़ानून से हांगकांग की स्वायत्ता खत्म हो जाएगी और इसमे भी चीन की तरह सामान्य कानून नियम होंगे। ब्रिटेन ने भी चीन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

होंगकोंग की स्वंतत्रता ख़तरे में। 

नए सुरक्षा क़ानून के तहत चीन को होंगकोंग के भीतर अपनी सुरक्षा एजेंसियों के गठन का अधिकार होगा। सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करना, सरकार की आलोचना करना, देश से रिश्ता तोड़ना, अपराध की श्रेणी में आएंगे। लोगों को डराना धमकाना या उनके ख़िलाफ़ हिंसा का इस्तेमाल चरमपंथ के अपराध के तहत आएगा। किसी विदेशी ताक़त का होंगकोंग के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप को देश की संप्रभुता पर प्रहार मन जाएगा। प्रस्तावित क़ानून के जिस प्रावधान को लेकर लोग ज़्यादा चिंतित हैं, वो ये है कि चीन होंगकोंग में ऐसी एजेंसियों की गठन कर सकता है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार होंगी। इसका मतलब ये हुआ कि होंगकोंग में चीन की अपनी क़ानून लागू करने वाली एजेंसी होंगी जबकि शहर में पहले से ही ऐसी एजेंसियां मौजूद हैं।

होंगकोंग में लागू है 'एक राष्ट्र दो सिस्टम' प्रणाली।

ब्रिटेन ने 1997 में चीन को होंगकोंग एक समझौते के तहत सौंपा था जिसमे होंगकोंग को स्वायत्ता का विशेष ध्यान रखा गया था। ब्रिटेन और चीन ने मिलकर होंगकोंग के लिए एक छोटा सविंधान भी बनाया था जिसमे 'एक राष्ट्र दो सिस्टम' प्रणाली लागू की गई थी। इस प्रणाली के तहत होंगकोंग के लोगों को एक जगह जमा होने और बोलने की आज़ादी थी। स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गई थी. इसके साथ ही कुछ लोकतांत्रिक अधिकार भी दिए गए थे. पिछले साल प्रत्यर्पण संधि को लेकर विवाद शुरू हुआ था. विरोध-प्रदर्शन इतना प्रभावी था कि सरकार को इसेसे अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन इस नए कानून से चीन की सुरक्षा एजेंसियों का होंगकोंग में सीधा हस्तक्षेप होगा। 

होंगकोंग में हो रहे हैं चीन के खिलाफ प्रदर्शन।

नए सुरक्षा को लेकर होंगकोंग के लोग गुस्से में हैं और हफ़्तों से प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले हफ्ते पुलिस ने लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। चीन की योजना होंगकोंग में नया सुरक्षा क़ानून लागू करने की है जिसका लोग वहां विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए होंगकोंग में प्रशासनिक कार्यालय के बाहर पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया था।
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