मनीष जांगड़ा, हिसार
ताज़ा आंकड़ो के अनुसार भारत का तेल आयात साल 2011 के अक्टूबर महीने के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. इसकी वजह तेल की मांग में लगातार आई कमी को बताया गया है.
भारत ने मई में 3.18 मिलियन बैरेल तेल प्रतिदिन खरीदा जोकि अप्रेल महीने के हिसाब से 26 फ़ीसदी कम रहा. इसकी वजह कोरोना संकट पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में मांग की भारी कमी को देखा जा रहा है. इस दौरान तेल कंपनियों ने तेल का स्टॉक इकट्ठा किया व केंद्र सरकार की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त तेल की आपूर्ति की हालांकि कोरोना वायरस के कारण कच्चे तेल के व्यापार पर काफ़ी असर पड़ा जिससे कच्चे तेल की कीमत अप्रेल में 36.78 बैरेल प्रति डॉलर जोकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर रही. अमेरिका में कच्चे तेल  की कीमत इतिहास में पहली बार नेगेटिव में पहुंच गई थी व सऊदी अरब में तेल की क़ीमतों में भारी कमी के कारण दुनिया मे तेल की सबसे बड़ी कम्पनी अरामको को भारी नुकसान पहुंचा था.
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव की वजह से ईरान से तेल का आयात काफ़ी कम हो गया है जिसकी वजह से मई में भी भारत ने सबसे ज्यादा तेल सऊदी अरब से ही खरीदा. पिछले दो महीनों से सऊदी अरब भारत को सबसे ज्यादा तेल निर्यात करने वाला देश बना हुआ है. हालांकि सऊदी अरब से तेल आयात में अप्रेल की तुलना में 28 फीसदी कमी हुई है. इराक़ से खरीदे जाने वाले तेल में भी 43 फीसदी कमी दर्ज़ की गई है जोकि साल 2016 के अक्टूबर के बाद ये सबसे कम दर्ज की गई है.
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